Nepal China Flood Rescue: 1,270+ मौतें, 4000 से अधिक लापता | Nation scope

Nepal China Flood Rescue: नेपाल-चीन सीमा पर बाढ़ का कहर, मौत का आंकड़ा 1,270 के पार, 4000 से अधिक लोग लापता | Nation scope

Nepal China Flood Rescue: नेपाल और चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में आई भयानक जल प्रलय के बाद राहत एवं बचाव कार्य (Nepal China Flood Rescue) का दौर लगातार जारी है। माउंट लांगटांग लिरुंग पर हिमनद (Glacier) फटने से आई इस विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में अब तक कुल मौतों का आंकड़ा 1,270 को पार कर गया है। नेपाल पुलिस, नेपाली सेना और चीनी राहत एजेंसियों के अनुसार, नेपाल में 1,250 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 20 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। राहत दल लगातार मलबे में दबे और नदियों के बहाव में बह गए लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं Flight operations और ड्रोन्स की मदद ली जा रही है ।

Nepal China Flood Rescue

क्या हुआ?

नेपाल और चीन के सीमावर्ती इलाके में स्थित रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और काठमांडू घाटी में पिछले सप्ताह के अंत में अचानक आई फ्लैश फ्लड (Flash Floods) और मूसलाधार बारिश ने भयंकर तबाही मचाई है। भोटकोशी और त्रिशूली नदियों में आए उफान ने पूरे के पूरे गांवों, राजमार्गों और कई जलविद्युत परियोजनाओं (Hydropower Projects) को अपनी चपेट में ले लिया।

ताजा जानकारी के अनुसार, इस आपदा में अब तक 4,700 से भी अधिक लोग लापता हैं, जिनमें 800 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं। भारत, चीन, अमेरिका, मलेशिया और दक्षिण कोरिया सहित कई देशों के पर्यटक व नागरिक लापता बताए जा रहे हैं ।

पूरा मामला

माउंट लांगटांग लिरुंग (Langtang Lirung) में लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ग्लेशियर टूटने से भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबे का बहाव शुरू हुआ। इस मलबे ने नदियों का रास्ता रोक दिया, जिसके बाद हुए अचानक धमाके जैसे प्रवाह से सीमावर्ती कस्बों में पानी और कीचड़ भर गया।

चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित केरुंग (Gyirong) सीमा व्यापार बिंदु पूरी तरह नष्ट हो गया है। सड़कें कट जाने के कारण Nepal China Flood Rescue अभियानों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है ।

अब तक क्या हुआ?

राहत अभियानों के तहत नेपाल और चीन दोनों देशों ने अपने रक्षा बलों और आपदा प्रबंधन टीमों (NDRF / International Search Teams) को तैनात किया है। अब तक हुए प्रमुख विकास कार्य निम्नलिखित हैं:

  • 12,000 से अधिक लोगों का रेस्क्यू: नेपाली सेना और सुरक्षा बलों ने हेलीकॉप्टरों और जिपलाइन की मदद से 12,000 से अधिक फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला है।
  • हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे श्रमिक: बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए 12 से अधिक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे सैकड़ों श्रमिकों को निकालने का काम तेजी से चल रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय मदद: भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की विशेष रेस्क्यू टीमें, डीएनए (DNA) जांच उपकरण, ड्रोन और पानी साफ करने वाली मशीनें लेकर नेपाल पहुंची हैं।
  • सांकेतिक अंतिम संस्कार: मलबे से शव न मिलने और पहचान न हो पाने के कारण नेपाल में पीड़ित परिवारों ने कुश की घास बनाकर अपनों का अंतिम संस्कार (Symbolic Funerals) करना शुरू कर दिया है।

जिलेवार तबाही और मौतों का आंकड़ा

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) और नेपाल पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों का विवरण नीचे दिया गया है:

प्रभावित जिला / क्षेत्र बरामद शवों की संख्या प्रमुख प्रभावित इलाके
चितवन (Chitwan) 355+ नदी किनारे के रिहाइशी इलाके
नवलपरासी (पूर्व व पश्चिम) 426+ नारायणी नदी बेसिन और मैदानी क्षेत्र
नुवाकोट (Nuwakot) 177+ त्रिशूली नदी तट और पुल
रसुवा (Rasuwa) 127+ तातोपानी, टिमुरे और सीमावर्ती चौकियां
चीन (तिब्बत / Gyirong) 21+ केरुंग बॉर्डर क्रॉसिंग

भारत पर असर

नेपाल से सटे भारतीय राज्यों जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की नदियों में जलस्तर अचानक बढ़ गया है। Government ऑफ इंडिया और Police प्रशासन ने सीमावर्ती जिलों में अलर्ट जारी किया है।

नेपाल की नदियों में बहकर आए कई शव नवलपरासी के रास्ते भारतीय क्षेत्र में पाए गए हैं, जिन्हें स्थानीय अधिकारियों ने नेपाली प्रशासन को सौंपा है। इसके अलावा तीर्थयात्रा (कैलाश मानसरोवर यात्रा) पर गए कई भारतीय नागरिक लापता हैं, जिनकी तलाश में Investigation और Fact Check टीमें काम कर रही हैं ।

"सड़कें पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं। हम सबसे दूरस्थ इलाकों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर, ड्रोन और जिपलाइन का इस्तेमाल कर रहे हैं। हमारा पहला लक्ष्य सुरंगों में फंसे लोगों को जिंदा बाहर निकालना है।" — Official Statement, Nepal Disaster Management Authority

Experts क्या कह रहे हैं?

पर्यावरणविदों और मौसम Experts का कहना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर बहुत तेजी से पिघल रहे हैं। इस तरह के 'ग्लेशियर लेक बर्स्ट' (GLOF) भविष्य में और अधिक विनाशकारी हो सकते हैं, जिसके लिए नेपाल और पड़ोसी देशों को मिलकर अर्ली वॉर्निंग सिस्टम मजबूत करने की जरूरत है ।

आगे क्या होगा?

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश होने का अनुमान जताया है, जिससे Nepal China Flood Rescue कार्य में और कठिनाई आ सकती है। काठमांडू और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में महामारी फैलने के खतरे को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां राहत सामग्री, दवाएं और पीने का शुद्ध पानी उपलब्ध करा रही हैं ।

Fact Check Box

वायरल दावा: Social Media पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि नेपाल में बांध टूटने से काठमांडू पूरी तरह डूब गया है।

Fact Check: यह दावा भ्रामक है। काठमांडू के निचले इलाकों में पानी जरूर भरा था और कुछ क्षति हुई है, लेकिन काठमांडू शहर पूरी तरह से जलमग्न नहीं हुआ है। वायरल वीडियो पुरानी बाढ़ का है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार बचाव कार्य जारी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: Nepal China Flood Rescue में मुख्य रूप से कौन-सी एजेंसियां लगी हैं?
उत्तर: नेपाल सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र प्रहरी बल के साथ-साथ चीन, भारत और दक्षिण कोरिया की विशेष आपदा राहत टीमें लगी हुई हैं ।

Q2: यह प्राकृतिक आपदा किस कारण से आई?
उत्तर: माउंट लांगटांग लिरुंग पर ग्लेशियर फटने (Ice-Rock Avalanche) और उसके बाद मूसलाधार बारिश से नदियों में अचानक आई भीषण बाढ़ के कारण यह तबाही हुई ।

Q3: कुल कितने लोग अब तक लापता बताए जा रहे हैं?
उत्तर: नेपाल और चीन दोनों तरफ मिलाकर 4,700 से अधिक लोग लापता हैं, जिनमें 800 से ज्यादा विदेशी नागरिक शामिल हैं ।

Q4: क्या भारतीय नागरिक भी इस बाढ़ में प्रभावित हुए हैं?
उत्तर: हां, कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमावर्ती क्षेत्रों में गए कई भारतीय नागरिक लापता हैं, जिनकी खोज जारी है ।

Q5: हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में फंसे लोगों की स्थिति क्या है?
उत्तर: लगभग 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों और पावरहाउस में सैकड़ों कर्मचारी फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है ।

Q6: मृतकों की पहचान कैसे की जा रही है?
उत्तर: नेपाल सरकार शवों के डीएनए (DNA) सैंपल संरक्षित कर रही है तथा भारत और चीन से आए एक्सपर्ट्स डीएनए मैचिंग तकनीक का उपयोग कर रहे हैं ।

Q7: चीन के सीमावर्ती इलाके में कितना नुकसान हुआ है?
उत्तर: चीन के तिब्बत स्थित केरुंग (Gyirong) पोर्ट और हाईवे को भारी नुकसान पहुंचा है, जहां 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है ।

Q8: प्रभावित क्षेत्रों में मदद के लिए हेल्पलाइन उपलब्ध है?
उत्तर: हां, नेपाल राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्राधिकरण (NDRRMA) और भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ।

निष्कर्ष

Nepal China Flood Rescue के तहत एजेंसियां बिना रुके लोगों की जान बचाने के प्रयास में जुटी हुई हैं। इस अभूतपूर्व प्राकृतिक त्रासदी ने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के खतरों को एक बार फिर रेखांकित कर दिया है ।

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